भिलाई में जुआ बंद कराने के लिए सिर्फ जुआरियों पर कार्रवाई काफी है या फिर जुए के पीछे खड़े कथित संरक्षण तंत्र तक भी पुलिस पहुंचेगी?—यह सवाल अब जनता के बीच चर्चा का विषय है।
भिलाई कैंप क्षेत्र में जुए के अड्डे पर पुलिस की कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड क्रमांक 34, कैंप-1 में पुलिस द्वारा जुए के फड़ पर दबिश देकर 12 लोगों की गिरफ्तारी और लाखों रुपये की जब्ती के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसे अवैध जुए के अड्डे बेखौफ होकर कैसे संचालित होते हैं?
जब किसी रिहायशी इलाके में खुलेआम जुआ चलने की बात सामने आती है और वहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि क्या स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी जिम्मेदार लोगों को नहीं होती? या फिर किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण मिलने के कारण अवैध गतिविधियां लंबे समय तक चलती रहती हैं?
मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि गिरफ्तार लोगों में एक पार्षद पति तथा भाजपा मंडल महिला मोर्चा पदाधिकारी के पति के शामिल होने की बात सामने आई है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल किसी जनप्रतिनिधि या राजनीतिक पदाधिकारी से जुड़े व्यक्ति की गिरफ्तारी को राजनीतिक संरक्षण का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसकी वास्तविकता की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकती है।
लेकिन जनता का सवाल अपनी जगह है—अगर जुआ अड्डा खुलेआम चल रहा था, तो इसे संचालित करने वालों को आखिर किसका डर नहीं था? क्या स्थानीय स्तर पर किसी प्रकार का राजनीतिक या प्रभावशाली संरक्षण था? क्या प्रशासन को इसकी जानकारी पहले से थी? और यदि जानकारी थी, तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई?
पुलिस की यह कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन अब जरूरत केवल जुआरियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहने की नहीं है। यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि जुआ अड्डे का संचालन कौन कर रहा था, इसके पीछे कौन लोग थे, आर्थिक लेन-देन किसके माध्यम से होता था और क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण या सहयोग प्राप्त था।
जनता चाहती है कि जांच निष्पक्ष हो और किसी भी राजनीतिक पहचान या पद के आधार पर कार्रवाई प्रभावित न हो। यदि किसी जनप्रतिनिधि, राजनीतिक कार्यकर्ता या प्रभावशाली व्यक्ति की संलिप्तता या संरक्षण सामने आता है, तो उसके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
सवाल जुआ खेलने वालों से आगे बढ़कर अब उस व्यवस्था तक पहुंचना चाहिए, जिसके भरोसे ऐसे अड्डे बेखौफ होकर संचालित होते हैं।
भिलाई में जुआ बंद कराने के लिए सिर्फ जुआरियों पर कार्रवाई काफी है या फिर जुए के पीछे खड़े कथित संरक्षण तंत्र तक भी पुलिस पहुंचेगी?—यह सवाल अब जनता के बीच चर्चा का विषय है।




