भिलाई इस्पात संयंत्र के विकास की योजनाएँ ऐसी हों, जिनसे शहर की पहचान बनी रहे, स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और सार्वजनिक सुविधाएँ मजबूत हों।

सामाजिक कार्यकर्ता सुमन शील ने कहा कि भिलाई की पहचान, गौरव और विकास का आधार भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) है। इसी संयंत्र ने भिलाई को राष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई। संयंत्र के साथ विकसित टाउनशिप, सेक्टर, अस्पताल, विद्यालय, खेल परिसर और सांस्कृतिक संस्थानों ने भिलाई को देश के सबसे व्यवस्थित औद्योगिक नगरों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भिलाई की पहचान से जुड़े कई संस्थान कमजोर होते गए हैं। कई स्कूल बंद हो गए, अनेक व्यावसायिक प्रतिष्ठान और बाजार खाली होते चले गए, जिससे टाउनशिप का सामाजिक और आर्थिक जीवन प्रभावित हुआ है। इसका असर शहर की छवि पर भी पड़ रहा है। भिलाई की वह जीवंतता, जिसके लिए यह शहर जाना जाता था, धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है। सुमन शील ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि भिलाई के भविष्य, स्थानीय उद्योगों के विकास, युवाओं के रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार को मजबूत करने पर गंभीर चिंतन किया जाए। बाहर से लोग आ रहे हैं, निवेश भी हो रहा है, लेकिन स्थानीय युवाओं को अपेक्षित रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। यह चिंता का विषय है और इस दिशा में ठोस नीति बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल, टाउनशिप और अन्य सार्वजनिक संस्थानों से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले व्यापक जनसंवाद होना चाहिए। साथ ही बंद पड़े स्कूलों को पुनः संचालित करने, खाली पड़े व्यावसायिक परिसरों को उपयोग में लाने, स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहन देने तथा भिलाई के युवाओं के लिए रोजगार सृजन की दिशा में प्राथमिकता के साथ कार्य किया जाना चाहिए।सुमन शील ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि भिलाई की पहचान, संस्कृति और आर्थिक जीवन का आधार है। यदि समय रहते शहर की मूल पहचान, शिक्षा, व्यापार और रोजगार के मुद्दों पर गंभीरता से काम नहीं किया गया, तो इसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ेगा। इसलिए विकास की योजनाए ऐसी हों, जो भिलाई की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखें, स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा करें और शहर को फिर से रोजगार, शिक्षा और औद्योगिक प्रगति का सशक्त केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ाए।




