भिलाई संतोषी पारा कैम्प-2 में निर्माणाधीन सामुदायिक भवन को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध। वार्ड-33 में सामुदायिक भवन निर्माण पर पारदर्शिता के साथ बनाने की मांग, RTI में नहीं मिला स्वीकृत नक्शा ।

भिलाई वार्ड 33, कैम्प-2 स्थित विवेकानंद नगर हरिसंघ मंदिर के सामने बंगाली समाज एवं सर्वसमाज के उपयोग हेतु निर्माणाधीन सामुदायिक भवन का सामाजिक कार्यकर्ता सुमन शील द्वारा निरीक्षण किया गया।निरीक्षण के दौरान लगभग 15 लाख रुपये की लागत से वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की विधायक निधि से कराए जा रहे निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय नागरिकों ने विभिन्न अनियमितताओं की आशंका व्यक्त करते हुए शिकायतें कीं। उनका कहना था कि निर्माण कार्य से संबंधित उनकी आपत्तियों एवं सुझावों को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है, जिससे क्षेत्रवासियों में असंतोष व्याप्त है। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य की गुणवत्ता, प्रक्रिया एवं पारदर्शिता को लेकर भी कई प्रश्न सामने आए। इस संबंध में निर्माण कार्य से जुड़े इंजीनियर दीपक देवांगन एवं ठेकेदार विनय सिंह से चर्चा कर आवश्यक जानकारी प्राप्त की गई।सुमन शील ने बताया कि निर्माण कार्य से संबंधित जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई थी, लेकिन उपलब्ध कराई गई जानकारी में निर्माण कार्य का स्वीकृत नक्शा उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे पारदर्शिता को लेकर प्रश्न उठते हैं। उन्होंने कहा कि यह सामुदायिक भवन वैशाली नगर के विधायक रिकेश सेन की विधायक निधि से स्वीकृत राशि के माध्यम से निर्मित किया जा रहा है। ऐसे में सार्वजनिक धन से किए जा रहे निर्माण कार्य में पूर्ण पारदर्शिता, निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन तथा सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृतियों का उपलब्ध होना आवश्यक है।निरीक्षण के दौरान स्थानीय नागरिकों ने यह भी आपत्ति दर्ज कराई कि निर्माण कार्य एक व्यक्ति विशेष के कहने पर लगभग 18 फीट स्थान छोड़कर कराया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे निर्माण की मूल योजना, उपयोगिता एवं सार्वजनिक धन के समुचित उपयोग को लेकर कई प्रश्न खड़े हो रहे हैं। लोगों ने मांग की कि संबंधित विभाग स्वीकृत नक्शे एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप स्थल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।स्थानीय नागरिकों ने यह भी बताया कि परिसर में पूर्व से निर्मित सुलभ शौचालय, जिसे लेकर कुछ लोगों द्वारा शासकीय भूमि पर कब्जे की आशंका व्यक्त की जा रही है, उसे नहीं हटाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त शासकीय खाली भूमि पर अवैध कब्जे की मंशा से बनाए गए बताए जा रहे सेप्टिक टैंक को भी हटाने की मांग की गई। लोगों का कहना है कि यदि सार्वजनिक निर्माण कार्य किया जा रहा है तो सभी प्रकार के अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति को विशेष लाभ नहीं मिलना चाहिए।उन्होंने कहा कि यह भवन बंगाली समाज एवं सर्वसमाज के उपयोग हेतु सामुदायिक भवन के रूप में ही बनाया जाना चाहिए। किसी भी व्यक्ति विशेष के दबाव अथवा निजी हित के कारण सार्वजनिक निर्माण कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि जिस भूमि पर निर्माण कार्य किया जा रहा है, वह प्रशासनिक भूमि है तथा किसी भी व्यक्ति का निजी स्वामित्व, उत्तराधिकार अथवा व्यक्तिगत अधिकार नहीं है। इसलिए भवन का निर्माण एवं उपयोग पूरी तरह जनहित एवं प्रचलित नियमों के अनुरूप होना चाहिए।


इस संबंध में अपनी आपत्तियां दर्ज कराने वालों में मुख्य रूप से अनिल मंडल, सपन राय, सुब्रत राय, उत्तम विश्वास, राजेश सरकार, कोमल सरकार, सुशील पात्रों, नर्मदा राय सहित अनेक स्थानीय नागरिक शामिल रहे। उन्होंने मांग की कि विधायक निधि से व्यय की जा रही राशि, शासकीय भूमि की वास्तविक स्थिति तथा समाज के सभी वर्गों के हित में यह सामुदायिक भवन निर्धारित मानकों के अनुरूप पूर्ण हो सके।



