भिलाई नगर कालीबाड़ी में बंगाली रीति-रिवाज से अमावस्या पूजा संपन्न, कमेटी के सदस्यों ने स्वयं तैयार किया पारंपरिक बंगाली भोग की खिचड़ी, पूरे आयोजन को सफल बनाने में भिलाई नगर कालीबाड़ी के कार्यसमिति सदस्य एवं प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं महिला विंग एवं युवा विंग के सदस्यों ने भी पूजा की तैयारियों, व्यवस्था तथा भोग-प्रसाद वितरण में सक्रिय सहभागिता निभाई। सभी के सामूहिक प्रयास से अमावस्या पूजा शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई।

भिलाई। भिलाई नगर कालीबाड़ी, सेक्टर-6 में 10 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या के पावन अवसर पर बंगाली रीति-रिवाज एवं धार्मिक परंपरा के अनुसार विशेष अमावस्या पूजा श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुई। पूजा का शुभारंभ शाम 7:30 बजे वरिष्ठ पंडितों द्वारा विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ किया गया।पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने विधिवत हवन में सहभागिता की। मंत्रोच्चार के बीच हवन संपन्न होने के पश्चात बड़ी संख्या में व्रती एवं उपस्थित श्रद्धालुओं ने माँ काली को पुष्पांजलि अर्पित की तथा परिवार की सुख-समृद्धि, शांति एवं मंगलकामना की।इस वर्ष की अमावस्या पूजा का विशेष आकर्षण पारंपरिक बंगाली भोग की खिचड़ी रही। पुराने समय से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार खिचड़ी तैयार करने की जिम्मेदारी किसी बाहरी व्यवस्था के बजाय कालीबाड़ी कमेटी के सदस्यों ने स्वयं संभाली। इसमें कमेटी के पुरुष सदस्यों के साथ-साथ महिला सदस्यों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया।कमेटी के सदस्यों ने मिलकर बंगाली रीति-रिवाज एवं पारंपरिक स्वाद को ध्यान में रखते हुए भोग की खिचड़ी तैयार की। इस पहल से पूजा में सामूहिक सहभागिता, आपसी सहयोग और बंगाली संस्कृति एवं परंपरा से जुड़ाव का भाव देखने को मिला। महिला एवं पुरुष सदस्यों के साथ मिलकर भोग तैयार करने से कालीबाड़ी परिसर में एक पारिवारिक एवं आत्मीय वातावरण भी बना रहा।

पूजा-अर्चना एवं पुष्पांजलि के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए भोग-प्रसाद एवं फल वितरण किया गया। भोग में विशेष रूप से पारंपरिक बंगाली खिचड़ी, सब्जी, खीर एवं मिठाई के रूप में रसगुल्ला शामिल रहा।

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भोग-प्रसाद ग्रहण किया।पूरे आयोजन के दौरान कालीबाड़ी परिसर मंत्रोच्चार, भक्ति एवं धार्मिक आस्था से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने बंगाली धार्मिक परंपरा के अनुरूप अमावस्या पूजा में भाग लेकर माँ काली का आशीर्वाद प्राप्त किया।





