भिलाई कैंप के वार्ड 33-34 में गरीबों के पट्टों की कथित खरीद-फरोख्त का खेल! जमीन कारोबारियों की सक्रियता से बढ़ी चिंता

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भिलाई के कैंप क्षेत्र के वार्ड 33 एवं 34 में गरीबों के पट्टे कम कीमत पर खरीदकर बाद में अधिक दाम पर बेचने की कथित शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों ने यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता सुमन शील के समक्ष रखा। एक ही व्यक्ति या परिवार द्वारा कई पट्टे खरीदे जाने की बात भी सामने आ रही है। सुमन शील ने प्रशासन से पट्टों के मूल हितग्राही, वर्तमान कब्जाधारी एवं कथित खरीद-फरोख्त की जांच कराने की मांग की है, ताकि गरीबों को मिले पट्टे जमीन के कारोबार का माध्यम न बनें।

भिलाई के श्रमिक क्षेत्रों, विशेषकर कैंप क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 33 एवं 34 में गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मिले पट्टों की कथित खरीद-फरोख्त को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। यह मामला स्थानीय लोगों ने सामाजिक कार्यकर्ता सुमन शील के समक्ष रखा है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि गरीब पट्टाधारकों की आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर कुछ लोग पट्टे के घर को कम कीमत पर खरीदकर निवेश के रूप में अपने पास रख रहे हैं और बाद में जमीन के मूल्य बढ़ने पर अधिक कीमत पर बेचने की कोशिश की जा रही है। एक ही व्यक्ति अथवा परिवार द्वारा अलग-अलग लोगों के कई पट्टे की घर अपने कब्जे में लिए जाने की बातें भी सामने आ रही हैं।स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि भिलाई में बाहर से आकर बसे कुछ लोगों द्वारा इस प्रकार की गतिविधियों में कथित रूप से सक्रिय भूमिका निभाई जा रही है। हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता सरकारी रिकॉर्ड एवं निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है, इसलिए प्रशासन से पूरे मामले की दस्तावेजों के आधार पर जांच कराने की मांग की गई है।सबसे गंभीर चिंता यह है कि यदि गरीबों को मिले पट्टे उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर कम कीमत पर खरीदे जा रहे हैं और बाद में ऊंचे दाम पर बेचने के लिए रखे जा रहे हैं, तो यह पट्टा योजना के मूल उद्देश्य को प्रभावित करने वाला मामला है। ऐसी गतिविधियों से जमीन के कारोबार से जुड़े दलालों और कथित भूमि माफिया की सक्रियता बढ़ने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।सामाजिक कार्यकर्ता सुमन शील ने कहा कि प्रशासन को वार्ड 33 एवं 34 सहित कैंप क्षेत्र में जारी पट्टों का रिकॉर्ड खंगालकर यह पता लगाना चाहिए कि एक व्यक्ति अथवा परिवार के नाम पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कितने पट्टे जुड़े हुए हैं। साथ ही मूल पट्टाधारी, वर्तमान कब्जाधारी और किसी भी कथित हस्तांतरण या खरीद-फरोख्त की पूरी श्रृंखला की जांच होनी चाहिए।उन्होंने मांग की कि पट्टों के हस्तांतरण के नियम, मूल हितग्राही की पात्रता, वर्तमान कब्जा तथा वास्तविक उपयोग का भौतिक सत्यापन कराया जाए। यदि किसी व्यक्ति द्वारा नियमों के विपरीत कई पट्टे के घर अपने कब्जे में लेने या गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाकर पट्टों की खरीद-फरोख्त करने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।सुमन शील ने जिला प्रशासन एवं राज्य शासन से मांग की है कि वार्ड 33 एवं 34 में विशेष सर्वे एवं जांच अभियान चलाकर पट्टा आवंटन एवं उसके बाद हुए कथित लेन-देन की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। उन्होंने कहा कि गरीबों को दिया गया पट्टा उनके सुरक्षित भविष्य का आधार है, इसे किसी भी स्थिति में जमीन के व्यावसायिक निवेश या खरीद-फरोख्त का माध्यम नहीं बनने दिया जाना चाहिए।

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