सुमन शील ने छत्तीसगढ़ शासन से पत्र लिखकर आग्रह किया कि आगामी शारदीय दुर्गा पूजा की महाअष्टमी के दिन प्रदेशभर की सभी शराब दुकानों को बंद रखने के लिए समय रहते स्पष्ट, लिखित एवं ठोस शासकीय आदेश जारी किया जाए और उसके पालन की जिम्मेदारी संबंधित विभागों को दी जाए।
शारदीय नवरात्रि एवं दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर महाअष्टमी के दिन पूरे छत्तीसगढ़ में शराब दुकानों को बंद रखने की मांग की गई है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं छत्तीसगढ़ बंगाली मित्र समाज के प्रदेशाध्यक्ष सुमन शील ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ शासन को पत्र भेजकर मांग की है कि महाअष्टमी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व के दिन प्रदेश की सभी शराब दुकानों को बंद रखने का स्पष्ट एवं ठोस शासकीय आदेश जारी किया जाए। सुमन शील ने कहा कि महाअष्टमी हिंदू समाज के लिए अत्यंत पवित्र एवं महत्वपूर्ण धार्मिक दिवस है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं। प्रदेशभर में विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। ऐसे पावन अवसर पर शराब की दुकानें खुली रहना श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को कहीं न कहीं ठेस पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और भाजपा स्वयं भारतीय संस्कृति, परंपराओं एवं धार्मिक आस्थाओं के सम्मान की बात करती है। ऐसे में महाअष्टमी जैसे महापर्व पर शराब दुकानों को बंद रखने का निर्णय सरकार की धार्मिक एवं सांस्कृतिक भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता को प्रदर्शित करेगा।सुमन शील ने कहा कि दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। महाअष्टमी के दिन मंदिरों और दुर्गा पूजा पंडालों में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रहती है। ऐसे समय में शराब की बिक्री पर रोक लगाने से धार्मिक वातावरण की गरिमा और पर्व की पवित्रता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार को राजस्व से जुड़े विषयों के साथ-साथ जनभावना, धार्मिक आस्था और सामाजिक सरोकारों को भी समान महत्व देना चाहिए। उन्होंने शासन से आग्रह किया कि आगामी शारदीय दुर्गा पूजा के दौरान महाअष्टमी के दिन प्रदेशभर की सभी शराब दुकानों को पूर्ण रूप से बंद रखने के संबंध में समय रहते स्पष्ट एवं बाध्यकारी शासकीय आदेश जारी किया जाए, ताकि सभी संबंधित विभागों और शराब दुकानों के संचालकों को इसकी स्पष्ट जानकारी रहे।उन्होंने कहा कि केवल घोषणा या मौखिक निर्देश पर्याप्त नहीं होंगे। शासन को इस संबंध में लिखित एवं स्पष्ट आदेश जारी कर सभी जिलों में उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना चाहिए। संबंधित अधिकारियों को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी दी जाए, ताकि महाअष्टमी के दिन किसी भी स्थान पर शराब की बिक्री न हो और श्रद्धालु शांतिपूर्ण एवं धार्मिक वातावरण में मां दुर्गा की आराधना कर सकें। सुमन शील ने कहा कि यह मांग किसी व्यक्ति, वर्ग या व्यवसाय के विरोध में नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था, सामाजिक मर्यादा और महापर्व की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से की जा रही है। दुर्गा पूजा के दौरान प्रदेशभर में लाखों श्रद्धालु धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं। ऐसे में महाअष्टमी के दिन शराब दुकानों को बंद रखने का निर्णय श्रद्धालुओं की भावनाओं के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाएगा। उन्होंने कहा कि राजस्व से ऊपर जनभावना और धार्मिक आस्था का सम्मान भी सरकार की जिम्मेदारी है। यदि सरकार महाअष्टमी के दिन शराब दुकानों को बंद रखने के संबंध में ठोस निर्णय लेती है, तो इससे श्रद्धालुओं में सकारात्मक संदेश जाएगा और दुर्गा पूजा के पावन वातावरण की गरिमा भी बनी रहेगी।






