छत्तीसगढ़ सरकार से बंगाली समाज लंबे समय से नमोशूद्र समुदाय को अनुसूचित जाति और कायस्थ जाती को पिछड़ा वर्ग के दर्जा में शामिल करने, 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर अवकाश एवं स्कूल कॉलेजों में जयंती मनाने की मांग रखी गई है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के द्वारा अपने निवास स्थल पर 17 अप्रैल को बंगाली समाज के लोगों को बुलाकर बंगाली नववर्ष मिलन समारोह आयोजित किए गए कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ बंगाली मित्र समाज के प्रदेशाध्यक्ष सुमन शील ने एक अच्छी पहल बताया है लेकिन इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ में रह रहे बंगाली समाज के हित के लिए किसी भी तरह की कोई घोषणा या समाज के द्वारा वर्षों से लगातार किए जा रहे मांगो के विषयों पर कोई चर्चा नही किए जाने पर समाज के लोगों में निराशा एवं इस मिलन कार्यक्रम को पश्चिम बंगाल के चुनाव की दृष्टि से इसे आयोजित किया जाना दर्शाता है । सुमन शील ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जाति की सूची में बंगाली समाज को शामिल नही किए जाने से छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से पिछले 60-70 वर्षों से रह रहे सुकमा, दंतेवाड़ा और कांकेर जैसे जिलों में बसे दलित बंगाली समाज (विशेषकर नमोशूद्र जाति) को अभी तक अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा तथा छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में 50 वर्षों से रह रहे कायस्थ जाती को पिछड़ा वर्ग (OBC ) का दर्जा नहीं मिला है, जिसके कारण वे आरक्षण और सरकारी योजनाओं से वंचित बने हुए हैं। बंगाली समाज लंबे समय से नमोशूद्र समुदाय को अनुसूचित जाति का दर्जा देने और कायस्थ जाती को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने के अलावा 23 जनवरी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर अवकाश रखने एवं स्कूल कॉलेजों में नेताजी की जयंती मनाने की मांग कर रहा है। सुमन शील ने बताया कि 17 अप्रैल को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित हुए कार्यक्रम में स्वयं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ प्रदेश के विकास में बंगाली समाज का सदैव महत्वपूर्ण योगदान तथा विशेष रूप से मत्स्य पालन एवं कृषि उन्नत में छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाई तक पहुंचने में बंगाली समाज की बड़ी भूमिका बताई है, उसके बावजूद बंगाली समाज को उसका मौलिक अधिकार नहीं दिया जाना समझ से पड़े है। छत्तीसगढ़ से लगे पड़ोसी राज्यों जैसे ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम में यह बंगाली समाज अनुसूचित जाति (SC) के रूप में मान्यता प्राप्त है, लेकिन छत्तीसगढ़ में नहीं। बंगाली समाज को जाती वर्ग में शामिल नहीं होने के कारण निकाय जैसे चुनाव में भी समाज को वंचित किया जाता है। छत्तीसगढ़ बंगाली मित्र समाज की मांग है कि छत्तीसगढ़ सरकार उन्हें अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करे ताकि आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा और नौकरियों में समान अवसर मिल सके तथा 23 जनवरी पराक्रम दिवस पर अवकाश घोषित करें ।








