भिलाई के सेक्टर 6 काली बाड़ी मंदिर में मां जगदात्री देवी की पूजा के साथ हवन, पुष्पांजलि और बलि दी जाएगी। फलों की बलि दी जाएगी। बंगाल की प्रसिद्घ सजावट की तरह ही कालीबाड़ी को भी सजाया गया है। बता दें कि पूरे भारत में पश्चिम बंगाल दुर्गा पूजा के साथ, जगद्घात्री पूजा का भी विशेष स्थान है। यह पूजा ओड़िशा के कुछ स्थानों पर भी बड़े उत्साह से मनाई जाती है। यह तंत्र से उत्पन्ना हुई है। यह मां काली एवं दुर्गा के साथ ही सत्व के रूप में हैं। इन्हें राजस एवं तामस का प्रतीक माना जाता हैं।
यह पर्व दुर्गा नवमी के एक माह बाद मनाया जाता है। कोलकाता चंदन नगर प्रांत में इस पर्व का जन्म हुआ था। यह चार दिवसीय पर्व है, जिसमे मेला सजता है। जगदात्री पूजा कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होकर दशमी तक मनाया जाता है। जगदात्री पूजा का विवरण बकिम चंद चटर्जी ने अपने उपन्यास बंदेमातरम में किया है। भिलाई नगर सेक्टर-6 के काली बाड़ी मंदिर में भिलाई में 30 अक्टूबर को जगदात्री माता की पूजा विधि विधान से की जाएगी। इसके लिए मां की छह फिट ऊंची प्रतिमा भी मंगाई गई है, हालांकि एक दिवसीय आयोजित कार्यक्रम में सप्तमी, अष्टमी, नवमी पूजा एक साथ सम्पन्न होगा तथा दोपहर 1.30 बजे भोग प्रसाद वितरण होगा। काली मंदिर को विभिन्न प्रकार से सजाया गया है। इस बार कोलकाता की तर्ज पर भिलाई के काली बाड़ी मंदिर में जगदात्री देवी पूजा होगी, जिसमें पूरे ट्विनसिटी के लोग दर्शन पूजन कर सकेंगे। भिलाई नगर कालीबाड़ी सेक्टर 6 के अलावा मां जगदात्री की पूजा भिलाई हाउसिंग बोर्ड कालीबाड़ी, हुडको कलीबाड़ी , दुर्ग पद्मनापुर में भी सम्पन्न होगा ।

