आज 22 जुलाई भौम प्रदोष व्रत पर बन रहा द्विपुष्कर योग, जानिए जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त, मंत्र ….

Spread the love

सावन का पहला प्रदोष व्रत 22 जुलाई को मनाया जाएगा। इस बार यह व्रत मंगलवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है।

ज्योतिष पंचांग के मुताबिक इस वर्ष सावन की शुरुआत 11 जुलाई से हो गई है और 9 अगस्त को समाप्त होंगे। सावन में महादेव और मां पार्वती की विशेष पूजा- अर्चना की जाती है। वहीं सावन में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व रखता। आपको बता दें कि सावन का पहला भौम प्रदोष व्रत 22 जुलाई यानी आज मनाया जाएगा। वहीं मंगलवार के दिन पड़ने के चलते यह भौम प्रदोष व्रत कहलाएगा। वहीं इस दिन द्विपुष्कर योग भी बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त…

भौम प्रदोष व्रत तिथि 2025 … वैदिक पंचांग के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 22 जुलाई को सुबह 07 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, 23 जुलाई को त्रयोदशी तिथि सुबह 04 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगी ।

जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त …
भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में किया जाने का विधान है। इसलिए इस दिन पूजा के लिए प्रदोष काल का समय शाम 7:18 बजे से रात 9:22 बजे तक शुभ रहेगा। साथ ही दिन के अन्य शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं: ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:14 से 4:56 बजे तक ।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:55 बजे तक । बन रहा ये शुभ योग …. इस दिन द्विपुष्कर योग बन रहा है। यह योग 05:37 ए एम से 07:05 ए एम तक रहेगा।

भोलेनाथ पर अर्पित करें ये चीजें …. सावन के दूसरे सोमवार को भगवान शिव को केला, सेब, अमरूद और बेलपत्र जैसे फल चढ़ाए जा सकते हैं। इसके अलावा, धतूरा और बेर भी शिवजी को प्रिय माने गए हैं, इन्हें भी आप भोलेनाथ को चढ़ा सकते हैं। वहीं भोलेनाथ को तुलसी के पत्ते, केतकी के फूल, शंख से जल, सिंदूर, हल्दी, लाल रंग के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए।

भोलेनाथ के मंत्र ….. 1 – ॐ नमः शिवाय 2 – ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः 3- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *