भिलाई के विभिन्न स्थानों पर सुहागिनों ने निर्जला व्रत रख कर वट सावित्री की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना की। सोलह श्रृंगार में सजी सुहागिन महिलाओं ने पारम्परिक विधि विधान के साथ बरगद वृक्ष के नीचे पूजा अर्चना कर कच्चे सूत लपेटते हुए उसकी परिक्रमा कर पति के दीर्घायु की कामना की।



सोमवती अमावस्या होने के कारण सुबह से ही वट सावित्री पूजन के लिए बरगद पेड़ के नीचे सुहागिन महिलाएं परिजनों के साथ जुटने लगी और नव विवाहित महिलाओं में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। भिलाई के वार्ड 33 यादव मोहल्ला कृष्ण चौक में वार्ड 33 एवं वार्ड 34 की महिलाओं ने उपवास रखकर विधि विधान पूर्वक वर्षों पुराने बरगद वृक्ष का पूजा अर्चना किया तथा अपने पतियों के दीर्घायु के लिए महिलाओं ने कच्चे सूत से बरगद के तने को लपेट कर 108 बार परिक्रमा लगाई।


वार्ड 34 शिवाजी नगर कैम्प 2 पम्प हाउस के सामने स्थापित 40 वर्ष पुरानी बरगद पेड़ स्थल पर नाली का निर्माण कार्य होने के चलते वार्ड 34 की अधिकतर महिलाएं वार्ड 33 संतोषी पारा यादव मोहल्ला में बरगद वृक्ष का पूजा करने पहुंचे। महिलाओं ने परंपरागत तरीके से पूजा करने के बाद वट वृक्ष के तने पर कच्चा धागा लपेटते हुए पांच, 11, 21, 51 या 108 बार परिक्रमा की। परिक्रमा के पश्चात वट सावित्री व्रत की कथा सुनी और बांस की टोकरी में वस्त्र, फल, मिठाई आदि रखकर दान किया। उल्लेखनीय है कि वट सावित्री व्रत को सौभाग्य, दीर्घायु और आरोग्य प्रदान करने वाला व्रत माना जाता है। हिंदूू धर्म में ऐसी मान्यता है कि जो भी स्त्री वट सावित्री व्रत रखती है उसका वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और पति को दीर्घायु मिलती है। 24 घण्टे व्रत रखने के उपरांत दूसरे दिन महिलाएं अपने व्रत को तोड़ने के उपरांत पूजा में चढ़ाई गई हलवा, पूड़ी, आटा के बने प्रसाद व विभिन्न किस्म के फल को ग्रहण किए।

