बिलासपुर । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी महिला का हाथ पकड़ना, उसे अपनी ओर खींचना और ‘आई लव यू’ कहना उसकी लज्जा भंग (Outraging Modesty) करने के समान है. न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि एक युवक द्वारा युवती के साथ ऐसा व्यवहार, विशेषकर ग्रामीण परिवेश में, अत्यंत आपत्तिजनक है और यह भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है.
यह मामला एक 19 वर्षीय युवक से जुड़ा है, जिस पर स्कूल से लौट रही एक लड़की का हाथ पकड़कर उसे खींचने और प्रेम का इजहार करने का आरोप था. निचली अदालत ने 2022 में युवक को दोषी ठहराते हुए तीन साल की कैद सुनाई थी.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आईपीसी की धारा 354 के तहत दोषसिद्धि को तो बरकरार रखा, लेकिन आरोपी की उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए सजा को तीन साल से घटाकर एक साल के कठोर कारावास में बदल दिया.
अदालत ने ‘शालीनता’ और ‘मर्यादा’ (Modesty) को परिभाषित करते हुए कहा कि महिला की गरिमा उसके व्यवहार और शुद्धता से जुड़ी होती है.
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मामले में पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दी गई सजा को रद्द कर दिया, क्योंकि यह साबित नहीं हो सका कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी. अदालत ने अब आरोपी को सरेंडर करने और शेष सजा काटने का निर्देश दिया है.

