बंगाल के शांत और समुद्र तटीय शहर दीघा में ममता बनर्जी ने 22 एकड़ में 250 करोड़ रुपए की लागत से पांच सालों में भव्य जगन्नाथ मंदिर बनवाया है और ये मंदिर आज से जनता के लिए खोल दिया गया । मंदिर पश्चिम बंगाल हाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने बनवाया है। बेशक ये मंदिर बहुत खूबसूरत और भव्य है, लेकिन विपक्ष आरोप लगा रहा है कि हिंदुओं की राजनीति करने के लिए ममता ने ये मंदिर बनवाया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार खुद अपना पैसा खर्च करके कोई धार्मिक स्थान नहीं बनवा सकती।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अक्षय तृतीया पर बुधवार दोपहर को उन्होंने महेंद्रक्षण में मंदिर का उद्घाटन किया। इस अवसर उन्होंने घोषणा की कि मंदिर का प्रसाद और तस्वीरें राज्य के हर घर तक पहुंचेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा, मुझे लगता है कि यह मंदिर आने वाले हजारों वर्षों तक तीर्थ और पर्यटन स्थल के रूप में लोगों को प्रिय रहेगा। मंदिर सभी के लिए है, आज से इसके कपाट खुल गए है। मैं सभी को आमंत्रित करती हूं। पूर्व मेदिनीपुर जिले के दीघा में मंदिर के उद्घाटन से पहले बुधवार को पुरी के जगन्नाथ मंदिर के पुजारी राजेश द्वैतपति के नेतृत्व में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का समारोह शुरू हुआ। इस्कॉन के राधारमण दास और 57 अन्य सेवक तथा 17 साधु मौजूद थे, यज्ञ में कुल एक करोड़ नरसिंह मंत्र का जाप किया गया। मंगलवार को महायज्ञ और ध्वजारोहण के बाद मुख्यमंत्री ने बुधवार को मंदिर के कपाट आधिकारिक रूप से खोले. मंदिर बुधवार से ही आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। उद्घाटन के दिन मंदिर परिसर में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी वहां मौजूद थीं। नचिकेता चक्रवर्ती और अदिति मुंशी समेत टोलीपाड़ा के कई प्रमुख कलाकार मौजूद थे। उद्घाटन से पहले ही दीघा में तीर्थयात्रियों और आगंतुकों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था।मंदिर के उद्घाटन के बाद सीएम ममता ने सोशल मीडिया पर मंदिर को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं, उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में भगवान जगन्नाथ के प्रथम दर्शन हृदय में अमिट रहेंगे। मूर्ति की पवित्र ज्योति से आत्मा तृप्त हो गई, मुझे आरती करने का सौभाग्य मिला और मैंने मां, माटी और मानुष पर ब्रह्मांड के स्वामी का आशीर्वाद मांगा।

मुख्यमंत्री ममता ने सोने की झाड़ू सौंपी संयोग से… मुख्यमंत्री ममता ने उसी दिन इस्कॉन अधिकारियों को सोने की झाड़ू सौंपी। मंदिर में आरती करने के बाद उन्होंने झाड़ू राधारमण दास को सौंप दी। पुरी के जगन्नाथ मंदिर में रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के मार्ग को सोने की झाड़ू से साफ करने की प्रथा है। मुख्यमंत्री ने पहले दीघा मंदिर के लिए सोने की झाड़ू के निर्माण के लिए अपने निजी कोष से 5 लाख 1 रुपये दान किए थे।



