ईशा पाल को न्याय दिलाने के लिए पिता सुबीर नन्दी के बाद छोटी बहन ने शिकायत दर्ज कर थाना प्रभारी के सामने कहीं प्रताड़ित कर मारा गया है मेरी बहन को, घटना के संबन्ध मे जानकारी रखने एवं देखने वाले कई लोग प्रशासन के सामने साक्षी देने को है इच्छुक ।

बहन प्रिया नन्दी ने बताया ईशा पाल के पति सुजय पाल ने अपनी सही उम्र को छुपाकर मेरी बहन से शादी की है। ईशा पाल से दुगना उम्र के है सुजय पाल तथा इनके बड़े भाई विजय पाल की शादी को भी छुपाया गया और ससुराल वालों की ओर से प्रताड़ित करने के कारण अपने बच्चे को लेकर अलग रहती है जेठानी ।

भिलाई कैम्प 2 विवेकानंद नगर बंगाली मोहल्ला संतोषी पारा में स्वर्गीय ईशा पाल की शादी के उपरांत से ही 2 लाख रुपए के लिए दहेज लोभी ससुराल वालों की ओर से प्रताड़ित करने तथा 23 नवम्बर 2024 घटना के दिन जलने के उपरांत 2 घंटे से अधिक समय तक उसी हालत में घर पर रखकर प्रताड़ित किए जाने स हुई बहन की मृत्यु के दोषी सास पुतुल पाल, ससुर दुलाल पाल, पति सुजय पाल , ननद ममता एवं जेठ विजय पाल के खिलाफ मृतक के पिता सुबीर नन्दी के उपरांत मृतक की छोटी बहन प्रिया नन्दी ने भी छावनी थाना प्रभारी मनीष मिश्रा के पास लिखित शिकायत देकर अपराध दर्ज कर सजा दिलाए जाने की मांग की गई है।

प्रिया नन्दी ने थाना प्रभारी मनीष मिश्रा को बताया कि भिलाई के विवेकानंद नगर संतोषी पारा कैम्प 2 बंगाली मोहल्ला के निवासी सुजय पाल से साल 2021 में ईशा पाल से शादी हुई थी और शादी के समय ईशा पाल के ससुराल वालों को मेरे पिताजी के द्वारा सोने की अंगूठी, हार आदी सोने के कई आभूषण सामग्री के अलावा अपने क्षमता के अनुसार घर में लगने वाली सामग्री के साथ शादी के रिसेप्शन तक का खर्चा को उठाकर बहन ईशा पाल को ससुराल विदा की गई। शादी के बाद से 2 लाख रुपए की मांग को लेकर सास पुतुल पाल, ससुर दुलाल पाल, ननद ममता के द्वारा तानाकशी करते हुए आ रहे थे और परेशान करने के लिए बचा हुआ खाना देते थे । बच्चे के जन्म को लेकर एवं मेरी मां के नाम पर चरित्रहीन परिवार कहकर मानसिक प्रताड़ित करने के साथ मायके वालों से मिलने के लिए रोका जाता था।

स्वर्गीय ईशा पाल
दहेज एवं विभिन्न विषयों को को लेकर सास पुतुल पाल मेरी बहन ईशा पाल को मारती थी, सहन करने की क्षमता खत्म होने पर मेरी बहन बताती थी, मैं स्वयं बहन के ससुराल ससुराल जाकर इस विषय पर कुछ बोलने से सास पुतुल पाल के साथ बड़ा बेटा तक विजय पाल मेरे ही सामने मारपीट किए जाते थे और विरोध करने पर विजयपाल के द्वारा मेरे ऊपर हाथ उठाने का प्रयास किए जाने की बाते प्रिया नन्दी की ओर से थाना प्रभारी के सामने कही गई ।

विवाहित ननद ममता जो बाहर रहती है, उसे जानकारी देने पर ननद अपने मायके आकर अपनी मां को बता देती थी, उसके बाद सास पुतुल पाल के साथ ननद, ससुर मिलकर ईशा पाल को प्रताड़ित करते थे, प्रताड़ित को सहन करने की क्षमता समाप्त हो जाने पर हमारे घर आकर रहने लगती थी परंतु जब भी मेरी बहन अलग होकर रहती थी, मेरी बहन के पति सुजय पाल आकर मैं फांसी लगा कर मर जाऊंगा तुम अलग रहोगे तो बोल कर फिर से मेरी बहन को अपने साथ लेकर चले जाते थे और कई बार मेरे पिता के द्वारा उसके बावजूद नही भेजने पर उनके दोस्त नाडु दा सहित कई दोस्त घर में आकर अपने गारंटी लेकर बहन को ले जाते थे। डिलीवरी होने से कुछ माह पहले हमारे घर से नाडु दा अपने गारंटी पर ईशा पाल को ससुराल लेकर गए थे । सास पुतुल पाल द्वारा मेरी बहन ईशा पाल का बैग चेक करने पर कुछ ना दिखने पर घर में घुसने नहीं दिया गया परंतु इसकी जानकारी हमारे परिवार को नही दिए बगैर मेरी बहन के पति सुजय पाल और उनके दोस्त ईशा पाल को दुर्ग में ले जाकर रखे थे और कुछ न बता पाए मोबाइल तक रख ली गई थी। दुर्ग में कुछ दिन रखने के बाद डिलीवरी के लिए पति सुजय पाल फिर से अपने घर लाकर रखने लगे थे और शंकराचार्य अस्पताल में लड़की पैदा होने पर अस्पताल में पति को छोड़कर ससुराल वालों की ओर से देखरेख किया जाना तो दूर मिलने तक कोई नहीं आए, डिलीवरी की जानकारी मिलने पर इसकी जानकारी हमलोगों को प्राप्त हुई, जिसके कारण अस्पताल से छुट्टी के समय पिताजी की ओर ससुराल घर ले जाने के लिए मना करने के बावजूद पति सुजय पाल फिर से एकबार अपने गारंटी में घर ले तो गए पर 5-6 दिन होते ही ससुराल के घर में 23 नवम्बर 2024 को शाम 6.30 बजे के लगभग मेरी बहन ईशा पाल घर के भीतर सास पुतुल पाल के सामने आगजनी की घटना घटी । घटना के समय मौके स्थल पर एक ही कमरे में ईशा पाल के साथ सास पुतुल पाल मौजूद रहने के बावजूद आग को बुझाने का कोई प्रयत्न तक नही की गई और तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भेजने के बजाए घर के भीतर कमरे में ले जाकर कई घंटों तक उसी हालत में रखी गई, मोहल्ले वासियों के कई लोगों की ओर से बार बार एंबुलेंस बुलाकर इलाज के लिए अस्पताल भेजने की बातें कहीं जाने के बाद भी एंबुलेंस से अस्पताल भेजने के बजाए प्राइवेट ऑटो गाड़ी में बैठाकर ले गए। समय रहते इलाज न हो सके कहीं ना कहीं इसलिए अस्पताल अस्पताल घूमने का कार्य किया जाता रहा। घटना काल से लेकर मृत्यु के दिन तक बहन ईशा पाल की ओर से एक ही बात कहती रही पापा से मेरी बच्ची को अपने पास रख लो। छावनी थाना प्रभारी की ओर से जॉच कर कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दी गई है।


