छत्तीसगढ़ में पूरे प्रदेश की रफ्तार मानो एक दिन के लिए थम सी गई थी। ड्राइवर महासंघ के “स्टेयरिंग छोड़ो, चक्का जाम आंदोलन” का जबरदस्त असर रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा, बिलासपुर, राजनांदगांव समेत लगभग सभी जिलों में देखने को मिला। सड़कों पर सन्नाटा और बस स्टैंडों पर यात्रियों की लंबी कतारें इस हड़ताल की गवाही दे रहा था। महासंघ ने सरकार के सामने 11 सूत्रीय मांगों की सूची रखी है, जिनमें पूर्ण शराबबंदी लागू करना, ड्राइवर आयोग का गठन, बीमा और पेंशन सुविधा, दुर्घटना में सहायता राशि, बच्चों को शिक्षा व नौकरी में आरक्षण, और ड्राइवर सुरक्षा कानून जैसी प्रमुख बातें शामिल हैं। संगठन का दावा है कि 60 हजार से अधिक ड्राइवर इस आंदोलन में शामिल हैं। राजधानी से लेकर गांवों तक मालवाहक वाहन, बसें, टैक्सी और ट्रक सभी ठप हैं, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।धमधा के पथरिया चौक में भी ड्राइवरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। नारेबाजी और बैनर-पोस्टर के साथ ड्राइवरों ने कहा “जब तक मांगे नहीं मानी जाएंगी, तब तक चक्का नहीं घूमेगा।” इधर, मुख्यमंत्री ने भी बयान जारी किया। एक कार्यक्रम में जब पत्रकारों ने उनसे हड़ताल पर सवाल किया, तो उन्होंने कहा “ड्राइवर भाइयों की जायज मांगों को सरकार पूरा करेगी।” बस संचालक संघ ने उम्मीद जताई है कि अगर सरकार ने आश्वासन दिया, तो कल से बसें फिर सड़कों पर दौड़ेंगी।फिलहाल, सरकार और ड्राइवर महासंघ के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन इस रस्साकशी में फिलहाल सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को हो रही है जो बस स्टैंडों पर अपने गंतव्य तक पहुंचने की आस में खड़ी है।


