चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा तिथि पर लगता है। 7 सितंबर को लगने वाला चंद्र ग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा पर लगेगा। जानें इस ग्रहण का शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या से पीड़ित राशियों पर क्या असर पड़ेगा।

साल का दूसरा व आखिरी चंद्र ग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा 7 सितंबर को लगेगा। चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 09 बजकर 58 मिनट पर प्रारंभ होगा और देर रात 01 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा। यह ग्रहण कुंभ राशि व पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में लगेगा। भारत में यह चंद्र ग्रहण नजर आने के कारण इसका प्रभाव ज्यादा रहने वाला है और सूतक काल भी मान्य होगा। चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसका धार्मिक महत्व भी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 7 सितंबर को लगने वाले चंद्र ग्रहण का मेष से लेकर मीन राशि पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा। जानें ज्योतिषाचार्य नरेंद्र उपाध्याय से चंद्र ग्रहण का शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या से पीड़ित राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

चंद्र ग्रहण का शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या से पीड़ित राशियों पर प्रभाव-पंडित उपाध्याय के अनुसार, वर्तमान में मेष, कुंभ व मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। मीन राशि पर दूसरा और कुंभ राशि पर आखिरी या तीसरा चरण चल रहा है। सिंह व धनु राशि पर शनि ढैय्या चल रही है। भाद्रपद पूर्णिमा पर लगने वाला चंद्र ग्रहण शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या से पीड़ित राशियों पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा। इस अवधि में इन राशियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। व्यापार में पार्टनरशिप का सामना करना पड़ सकता है। कान, नाक व गला की परेशानी हो सकती है। मुख्य रूप से इन पांच राशि वालों को शारीरिक व व्यावसायिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।ग्रहण किस समय होगा अपने चरम पर: ज्योतिष गणना के अनुसार, यह ग्रहण रात 11 बजे से देर रात 12 बजकर 22 मिनट पर अपने चरम होगा। चंद्र ग्रहण का सूतक काल नौ घंटे पू्र्व प्रारंभ होता है। ऐसे में इस ग्रहण का सूतक काल 7 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगा। यह ग्रहण समाप्त होने के साथ खत्म होगा।

