छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित डीएमएफ घोटाला, पूर्व IAS रानू साहू और सौम्या चौरसिया समेत 9 पर आरोप, 6000 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में पेश ..

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टेंडर प्रक्रिया में निजी कंपनियों को अवैध लाभ दिया गया, जिसमें 15 से 40% तक कमीशन के रूप में सरकारी अधिकारियों को शामिल किया गया।

रायपुर 27 मई : जिला खनिज निधि (डीएमएफ) के मामले में छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने रायपुर की विशेष अदालत में 6000 खनिज संपदा की विस्तृत जांच की है। इस मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू, पूर्व उप सचिव सौम्या ओझा, क्षत्रिय सूर्यकांत तिवारी सहित 9 लोगों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया।

एमकेएफ संधि : क्या है मामला ? ईडी (ईडी) की जांच के आधार पर ईओडब्ल्यू ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि कोरबा जिले के मियामी माइनिंग फंड (डीएमएफ) के अधीन शेयरों में बड़े पैमाने पर हिस्सेदारी शामिल है। टेंडर प्रक्रिया में निजी कंपनियों को अवैध लाभ दिया गया, जिसमें 15 से 40% तक कमीशन के रूप में सरकारी अधिकारियों को शामिल किया गया।

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